भारत की प्रमुख टेलीकॉम कंपनी Vodafone Idea (Vi) के शेयरों ने मंगलवार, 19 अगस्त को थोड़ा ऊपर की ओर रुख दिखाया। कंपनी ने हाल ही में अपने निवेशकों और विश्लेषकों से एक पोस्ट-अर्निंग कॉल में बताया कि वह अपनी पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) को पूरा करने के लिए फंड जुटाने की योजना बना रही है। हालांकि, कर्ज जुटाने में हो रही देरी और कंपनी का बाजार में हिस्सेदारी कम होना निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
कंपनी के सीईओ अक्षया मोंद्रा ने कहा कि बैंक से फंडिंग के लिए बातचीत जारी है, लेकिन अभी इसका अंतिम फैसला लेने में समय लगेगा। उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी गैर-बैंकिंग स्रोतों से पूंजी जुटाने के विकल्प तलाश रही है क्योंकि बैंक के साथ बातचीत कुछ विवाद के चलते स्थगित हैं। कंपनी ने सरकार से इस एजीआर मसले को मार्च 2026 की अंतिम तारीख से पहले हल करने का आग्रह भी किया है ताकि बैंक समर्थित वित्तीय मदद फिर से शुरू हो सके।
शेयर बाजार में मंगलवार को दस बजे के करीब Vodafone Idea के शेयर 6.55 रुपये पर थे, जो एक दिन में 1.5 प्रतिशत की बढ़त दर्शाते हैं। लेकिन मार्केट एक्सपर्ट इस बात को लेकर चिंता जता रहे हैं
Vodafone Idea पर ब्रोकरेज फर्म ने की टारगेट में कटौती
प्रमुख ब्रोकरेज हाउस, नुवामा इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज़ ने ‘होल्ड’ कॉल देते हुए कहा कि अगर कर्ज नहीं मिला तो 2025-26 की दूसरी छमाही में कैपेक्स कम हो सकता है और कंपनी के ऑपरेशनल नकदी प्रवाह का ज्यादातर हिस्सा निवेशों में लग सकता है। वहीं, मोटिलाल ओसवाल ने कहा कि कंपनी मार्केट में हिस्सा लगातार घटा रही है। उन्होंने अपने टारगेट प्राइस को घटाकर 6 रुपये किया और ‘सेल’ कॉल जारी की। मोटिलाल ओसवाल के अनुसार, कंपनी के उपभोक्ता आधार में गिरावट और ग्राहकों का कंपनी छोड़ना जारी है, जो वोडाफोन आइडिया के लिए चिंता का विषय है।
कंपनी ने हाल ही में 31 जून 2025 को समाप्त तिमाही के वित्तीय परिणाम जारी किए। इस दौरान कंपनी को 6,608 करोड़ रुपये का शुद्ध नुकसान हुआ, जो पिछले साल की तुलना में थोड़ा ज्यादा है लेकिन फिर भी पिछली तिमाही के 7,166 करोड़ रुपये के नुकसान से बेहतर है। कंपनी का कुल राजस्व 11,022 करोड़ रुपये रहा, जो वर्ष-दर-वर्ष 5 प्रतिशत बढ़ा है। साथ ही, प्रति उपयोगकर्ता औसत राजस्व (ARPU) भी 177 रुपये पहुंच गया जो विशेषज्ञों की उम्मीद से बेहतर रहा।
कंपनी ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में उपभोक्ता समूह में बेहतर ग्राहक जुड़ रहे हैं, लेकिन फिर भी प्रतिस्पर्धा और टैरिफ बढ़ोतरी के बावजूद एआरपीयू बढ़ाने में चुनौतियां बनी हैं। एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार कंपनी ने पिछले तिमाही में अपनी बाजार हिस्सेदारी में 0.2 फीसदी की गिरावट देखी है, जो लंबे समय से कंपनी के लिए चिंता का विषय है।
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