Vodafone Idea (Vi) एक समय देश की तीसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कंपनी की हालत काफी खराब हो गई। भारी कर्ज, घटती ग्राहक संख्या, और सुप्रीम कोर्ट के AGR (Adjusted Gross Revenue) बकाया मामलों की वजह से वोडाफोन आइडिया बड़े वित्तीय संकट से लगातार जूझ रही है। हाल ही में कंपनी को 53,000 करोड़ रुपये के बकाए को इक्विटी में बदलने के बाद थोड़ी राहत ज़रूर मिली, लेकिन बाजार में टिके रहने और प्रतिस्पर्धा बरक़रार रखने के लिए कंपनी को हर हाल में बड़ी फंडिंग की जरूरत है।
इसी सिलसिले में Vodafone Idea ने करीब 5,000 करोड़ रुपये की कर्ज फंडिंग के लिए तेज़ी से बातचीत शुरू कर दी है। यह डील फाइनल स्टेज में है और अगले कुछ हफ्तों में पूरी हो सकती है। जानकारी के अनुसार, फंडिंग Vodafone Idea Telecom Infrastructure Ltd. के ज़रिए जुटाई जाएगी, जिसमें कंपनी के टेलीकॉम इन्फ्रास्ट्रक्चर और कुछ रिन्यूएबल एनर्जी एसेट्स शामिल हैं। इस डील के सलाहकार के रूप में JM Financial को नियुक्त किया गया है। अगर यह डील समय पर पूरी हो जाती है तो कंपनी के लिए ये बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है।
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फंड का इस्तेमाल
इस फंड के इस्तेमाल का सबसे बड़ा मकसद कंपनी के नेटवर्क का विस्तार और चुनिंदा 5G रोलआउट करना है। जानकारों का कहना है कि यह पैसा 2026 की पहली छमाही तक कंपनी को अपने निवेश से जुड़ी सभी योजनाओं के लिए पर्याप्त लिक्विडिटी देगा। इसी के साथ वोडाफोन आइडिया की हालिया तिमाही रिपोर्ट में भी धीरे-धीरे सुधार देखने को मिला है। जहां पहले कंपनी हर तिमाही औसतन 50 लाख ग्राहक खो रही थी, वहीं अब यह संख्या घटकर 5 लाख रह गई है। इससे साफ है कि नेटवर्क सुधार, बेहतर कस्टमर सर्विस और 4G सेवाओं को मजबूत करने जैसे कदमों का असर पड़ने लगा है।
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हालांकि, इतना सबकुछ करने के बावजूद वोडाफोन आइडिया को फंडिंग मिलने की राह में बड़ी चुनौतियाँ अब भी बनी हुई हैं क्योंकि मार्च 2026 से कंपनी को हर साल करीब 18,000 करोड़ रुपये का AGR भुगतान करना होगा। यही वजह है कि बैंक फंडिंग में अनिश्चितता को देखते हुए कंपनी प्राइवेट चैनल्स से पैसा जुटाने की कोशिश कर रही है। सरकारी राहत भले ही अस्थाई सहारा दे, लेकिन केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि कोई भी अतिरिक्त राहत कैबिनेट के स्तर पर ही दी जा सकती है और इस पर अभी कोई स्पष्टता नहीं है, क्योंकि अब कंपनी में सरकार सबसे बड़ी हिस्सेदार जरूर बन गई है, लेकिन राजनीतिक और वित्तीय जोखिम अब भी बने हैं।
इसी कारण, आने वाले कुछ हफ्ते वोडाफोन आइडिया और उसके निवेशकों के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं। अगर पांच हजार करोड़ की ये फंडिंग डील जल्द और कंपनी के हक में पूरी हो जाती है तो कंपनी अपनी मौजूदा स्थिति को थोड़ा मजबूत करके फिर से बाजार में ग्रोथ के रास्ते पर लौट सकती है। वहीं अगर इसमें देर या अड़चन आती है तो कंपनी की वित्तीय चुनौतियां और गहरा सकती हैं। आज की तारीख में जियो, एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ही वो तीन प्रमुख कंपनियां हैं जो देश के टेलीकॉम सेक्टर की तस्वीर तय करती हैं और Vi की हालत सिर्फ कंपनी के लिए ही नहीं बल्कि पूरे टेलीकॉम सेक्टर के लिए अहम है।hindi.cnbctv18
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